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चंदन की खेती

हम उत्तर भारत में केवल चंदन की नर्सरी हैं, जिन्हें चंदन के पौधे लगाने का उच्च अनुभव है।

हमारे पास चंदन के बागान में 4 साल का अनुभव है। हमारे पास चंदन के पौधों में रोग और कीटों का ज्ञान और अनुभव है और हम पौधों की सुरक्षा भी कर सकते हैं।

कैसे तैयार होता है चंदन का पेड़?

चंदन के पेड़ को शुरू के 8 सालों तक किसी बाहरी सुरक्षा की जरूरत नहीं होती क्योंकि उस समय तक इसमें खुशबू नहीं होती. ही पेड़ की लकड़ी के पकने की प्रक्रिया की शुरूआत होती है वैसे ही इसमें खुशबू आनी शुरू हो जाती है. इसी दौरान इसे सुरक्षा की जरूरत होती है. किसान भाई इसे अन्य जानवरों से बचाने के लिए खेत की घेराबंदी जरूर करवा दें. 

कितने प्रकार के चंदन?

चंदन के दो प्रकार होते हैं. एक सफेद चंदन और दूसरा लाल चंदन. उत्तर भारत में सफेद चंदन की खेती सबसे ज्यादा होती है. क्योंकि इसमें 7.5 पीएच वाली मिट्टी की जरूरत होती है. वहीं लाल चंदन के पेड़ के लिए 4.5 से 6.5 पीएच वाली मिट्टी की जरूरत होती है. यही कारण है कि लाल चंदन की खेती दक्षिण भारत में की जाती है. चंदन के पेड़ रेतीले और बर्फिले इलाके में नहीं उगाए जा सकते.

औषधीय एवं वाणिज्यिक फसलों में चन्दन एक ऐसा पेड़ है जिसकी लकड़ी भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता से जुडी हुई है | अगर बात हिन्दू धर्म में पूजा – पथ की हो तो और भी महत्व बढ़ जाता है | ऐसा कोई घर नहीं है जिसके पास चन्दन की लकड़ी नहीं है | इसकी महत्ता यहीं तक सिमित नहीं है बल्कि इसकी लकड़ी से औषधीय तथा सुगन्धित इत्र बनाया जाता है इसलिए इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में मौजूद है | उत्पादन कम रहने के कारण चन्दन की लकड़ी की कीमत बहुत ज्यदा है | वर्तमान समय में भारत में 7,000 से 8,000 टन प्रति वर्ष लकड़ी खपत है लेकिन उपलब्धता मात्र 100 टन तक ही है |

 

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ग्राम भिडूकी होडल जिला पलवल​

 

ग्राम भिडूकी होडल जिला पलवल मे 15 महीने के चंदन के पौधे

हमारी दृष्टि

हम किसानों को चंदन लगाने में मदद कर रहे हैं ताकि वे 12 से 15 साल में अमीर बन सकें

यह वैकल्पिक तरीका भी है जिससे किसान अपनी कृषि से धनवान बन सकते हैं

मीडिया से जागरूकता
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9 साल में चंदन की खेती से किसान ने कमाए 30 करोड़ रु

 

गुजरात के भरूच जिले के हांसोट तालुका के कांटासायण गांव में अल्केश भाई पटेल ने चंदन की खेती की शुरुआत की थी !
2010-11 में स्‍थानीय विधायक और मंत्री ईश्‍वर सिंह पटेल की मदद से वनविभाग से चंदन के पौधे लिए थे. किसान अल्‍केश ने दो एकड़ जमीन में सफेद चंदन की खेती की शुरुआत की थी. अब चंदन के ये पौधे पेड़ बन चुके हैं. इन पेड़ की कीमत अब 30 करोड़ रुपये हो चुकी है

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Zee News - चंदन की मांग 300 प्रतिशत है जबकि इसका उत्पादन महज 30 प्रतिशत तक होता है।

 

चंदन अपनी खुशबू को लेकर हर किसी को आकर्षक करता है. चंदन की लकड़ी बहुत महंगी बिकती है. अगर मांग और उत्पादन के हिसाब से देखा जाए तो चंदन की मांग 300 प्रतिशत है जबकि इसका उत्पादन महज 30 प्रतिशत तक होता है. भारत में ऐसे बहुत से किसान हैं, जो चंदन की खेती से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये कमा रहे हैं. 

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